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हरिद्वार स्थित शंकराचार्य मठ में गुरुवार दोपहर पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई धर्मसंसद में साईं को भगवान नहीं मानने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें सभी शंकराचार्यों के प्रतिनिधि, 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर सहित बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए थे। यह सामूहिक निर्णय था। इसके बाद भी मुकदमा सिर्फ हमारे खिलाफ दर्ज किया गया। शंकराचार्य ने कहा कि अपने धर्म के प्रचार की सभी को स्वतंत्रता है। फिर हम अपने धर्म का प्रचार क्यों नहीं कर सकते? हमने कोई आपराधिक काम नहीं किया है। यह अन्याय है और इसका विरोध होना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि यदि लोग चाहते हैं तो वह जेल जाने को भी तैयार हैं, लेकिन जेल में भी वे यही कहेंगे कि साईं भगवान नहीं हैं।

ज्यादती कर रही है पुलिस

हरिद्वार। शंकराचार्य ने कहा कि रमानंद नाम के एक युवक ने उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी। उसका जवाब देने के लिए हमारे शिष्य गोविंदानंद शिरडी के लिए रवाना हुए, लेकिन वहां पुलिस प्रशासन ने पहले ही धारा 144 लगाते हुए गोविंदानंद को रोक दिया। सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां घेरा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि शिरडी में सनातन धर्म को मानने वालों से पुलिस को क्या आपत्ति है। क्या वहां शिरडी का ही राज है?

दलित के नाम पर न करें राजनीति

हरिद्वार। दलितों के नाम पर राजनीति करने वालों को शंकराचार्य ने आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि दलित कोई जाति नहीं है। कुछ लोगों ने राजनीति करने के लिए यह नाम दिया है। पहले जाति के नाम पर राजनीति की जाती है और बाद में अपना मतलब निकलने पर लोगों को भुला दिया जाता है। शंकराचार्य ने कहा कि वह किसी को दलित नहीं मानते। सभी लोग भगवान का रूप हैं।

Source: sai in not god shankracharya – LiveHindustan.com