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पूजन सामग्री को गंगा के मुख्य प्रदूषण के कारकों में होने से इंकार करते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण की मुख्य वजह औद्योगिक कचरा एवं सीवेज है। पूजन सामग्री केवल रुके हुए पानी में कुछ प्रदूषण करती है, लेकिन अब उसको भी जीवनयापन के रूप में उपयोग करने के लिए एक प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। उमा भारती ने कहा कि गंगा को प्रदूषण से रोकने के लिए प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कड़े प्रावधानों वाला एक कानून लाने पर विचार कर रही है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जबाब में उमा भारती ने कहा कि नदी में डाली जाने वाली पूजन सामग्री प्रवाह के साथ स्वयं बह जाती है। किन्तु जब अन्य प्रदूषण के कारण नदी का बहाव कम या बाधित होता है तो यह पूजन सामग्री एक जगह एकत्र होकर प्रदूषण बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि पूजन सामग्री के निस्तारण का उपयोग करने के लिए नमामि गंगे परियोजना में स्थानीय लोगों के जरिए जीवनयापन (लाइवलीहुड) का भी एक प्रोजेक्ट बनाया गया है। इसमें बेकार पूजन सामग्री से ऐसी चीजें बनाने की कोशिश की जाएगी जिसमें यह कचरा काम आ सके और स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। इस प्रोजेक्ट की रिपोर्ट आने के बाद इस बारे में काम किया जाएगा। गौरतलब है कि नमामि गंगा पररियोजना के तहत यूएनडीपी के साथ एक समझौता किया गया है जिसके तहत यूएनडीपी स्थानीय रोजगार पर परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रही है।

उमा भारती ने कहा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए गए सर्वेक्षण में गंगा बेसिन में 501 एमएलडी अपशिष्ट जल उत्पन्न करने वाले 764 पूरी तरह प्रदूषणकारी उद्योगों का पता चला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही बोर्ड को विभिन्न जगहों पर गंगा जल की गुणवत्ता की जांच का पता लगाने के मकसद से उपकरण लगाने के लिए 196 करोड़ रुाये दिए गए हैं। छह शहरों मथुरा-वृंदावन, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना और दिल्ली (यमुना) में ट्रैश स्कीमरों द्वारा नदी सतह और घाट सफाई कार्यक्रम शुरू किया गया है।