नालंदा। विश्व प्रसिद्ध प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावेश को यूनेस्कों द्वारा विश्व धरोहर में शामिल कर लिए जाने से जिले में हर्ष का माहौल बन गया है। वहीं इसके शामिल होने से समस्त भारत वर्ष के लिए गौरवमयी उपलब्धि बन गया है। नालंदा जिला व राज्य के लिए यह गौरव की बात है नालंदा के भग्नावेश को विश्व धरोहर में शामिल होना।

जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर जिले के नागरिकों को बधाई दी है। यहां बता दें कि आइसीओमॉस के एक्सपर्ट प्रोफेसर मसाया मसूई के नेतृत्व में बीते वर्ष 2015 के 26 अगस्त को आई जांच दल ने नालंदा खंडहर का बारिकी से अवलोकन किया था। यहीं नहीं इससे संबंधित जानकारी के लिए उस क्षेत्र में रिक्शा, टमटम चलाने वाले तथा दुकान-दौरी करने वाले के अलावा प्रबुद्धजनों के साथ एक साथ बैठक एक मंच पर करके नालंदा खंडहर के बारे में अहम जानकारी हासिल की थी।

यहीं नहीं उसी दौरान 27 अगस्त को आइसीओमास के एक्सपर्ट टीम के सदस्यों ने आसपास का भ्रमणकर अन्य पुरातत्व एवं ऐतिहासिक स्थलों का जायजा लेकर अहम जानकारी एकत्रित की थी। उसी दिन राजगीर अवस्थित आरआइसीसी के सभागार में जिला प्रशासन के सहयोग से जनप्रतिनिधियों के साथ आइसीओमॉस की टीम ने एक साथ बैठक की थी। जांच टीम एक साथ सभी वर्ग के लोगों का बैठक में शामिल होते देख टीम व एएसआइ के पदाधिकारियों काफी प्रभावित थे। उस बैठक को यूनेस्को टीम के सदस्यों ने अनोखी बैठक बताया। जिसमें सभी वर्ग के लोग एक बराबर स्थान दिया गया था। वहीं बैठक में शामिल लोग नालंदा को वल्र्ड हेरिटेज में शामिल कराने के लिए काफी उत्सुक दिखे थे।

डीएम ने कहा कि नालंदा खंडहर को वल्र्ड हेरिटेज में शामिल होने से जिले के साथ राज्य सरकार का मान बढ़ा है। इससे अब नालंदा जिला पर्यटन के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई हासिल करेगा। इधर नालंदा को वल्र्ड हेरिटेज में शामिल होने पर स्थानीय सांसद ने कहाकि वे काफी लंबे समय से इसे विश्व धरोहर में शामिल कराने के लोकसभा में आवाज उठाते आ रहे थे। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं। उनकी पहल व जिला प्रशासन का प्रयास का नतीजा है कि नालंदा को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया। उन्होंने कहा कि आज की तारीख बिहार के इतिहास लिखने वाले स्वर्ण अक्षरों में लिखेंगे।