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नई दिल्‍ली : गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस बार मंगलवार (19 जुलाई) को मनाया जा रहा है। यह पावन दिन अपने आराध्य गुरु को श्रद्धा अर्पित करने का महापर्व है। देशभर में गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही इस दिन गुरु की वंदना, आराधना भी की जाती है। बता दें कि माता-पिता के बाद जीवन में गुरु का महत्व सर्वविदित है। शिक्षा का संस्कार हमें अपने गुरुजनों से ही मिलता है। गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों, शिष्‍यों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। कहा जाता है कि गुरु के आशीर्वाद से आज सारे काम सिद्ध हो जाते हैं।

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरू पूर्णिमा से जुड़ी तमाम मान्यताओं में एक यह है कि इस दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन महर्षि व्यास का जन्मदिन भी है। कृष्ण द्वैपायन व्यास संस्कृत के प्रकाण्‍ड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की, इसलिए उनका नाम वेद व्यास पड़ा। वेद व्यास के सम्मान में हर साल गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। भारतीय धर्मग्रंथों में गुरु का बेहद अहम स्थान है, गुरु को ईश्वर का समतुल्य दर्जा मिला है। कहते हैं कि बिना गुरु ज्ञान नहीं मिलता। गुरु पूर्णिमा पर गुरु अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गुरु को आज गुरु पूर्णिमा के दिन पूरे ह्रदय से नमन किया जाता है। जिससे व्यक्ति के जीवन में यदि कठिनाइयाँ आएं, तो उसे उन कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिले और गुरु का आशीर्वाद सदा उसके माथे पर बना रहे।

अगर आपकी कुंडली में में गुरु अशुभ स्थिति में है। जिसके कारण आपको कई परेशानियों का सामना करना पडता हैं। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि जिस व्यक्ति का गुरु खराब होता है। उसका किसी भी काम में कम नहीं लगहता है। साथ ही किसी भी काम में सफलता प्राप्त नहीं होती हैं। नौकरी, पढाई, दापत्यं जीवन में उथल-पुथल मची ही रहती हैं। अगर आपके साथ ही य़े समस्या है तो गुरु पूर्णिमा के दिन इन उपाय़ों में से कोई एक उपाय करें। इससे आपके ब्रहस्पति भगवान की कृपा बनी रहेगी। साथ ही आपकी जीवन में हमेशा खुशियां रेहगी।

गुरु कमजोर होने से वे कभी नेतृत्व नहीं कर पाते हैं। खुद पर भरोसा नहीं होने से ऐसे लोग हमेशा दूसरों के अधीन रह कर ही काम करने के आदि हो जाते है। ऐसे लोगों का विवाह होने, संतान होने में भी काफी परेशानी होती है। गुरु को शुभ योग में लाने के लिए जातकों को गुरु को प्रसन्न करना होगा। यदि जातक नियमित रूप से नियम पूर्वक मंत्र जाप करें तो निश्चित तौर पर इसमें सफलता मिलेगी।  यदि गुरु पूर्णिमा के शुभ योग में किए जाएं तो इनके बहुत ही जल्दी शुभ फल प्राप्त होते हैं।

यदि आप गुरु के अनिष्टकारी प्रभाव से आप परेशान हैं तो बृहस्पति का मूल मंत्र और शांति पाठ आपके लिए कल्याणकारी हो सकता है। इसके लिए यह मंत्र करे- ऊं बृं बृहस्पतये नम:। अगर आपकी कुंडली में गुरु का दोष हो तो हर गुरुवार को शिवजी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इससे आपको काफी फायदा मिलेगा। इस दिन प्रात: काल उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद भगवान गुरु को स्मरण कर उनकी पूजा-अर्चना करें।

गुरू के आशीर्वाद को सबसे अधिक पवित्र और शीघ्र फलदायी माना जाता है। गुरू पर्व के दिन सुबह घर की सफाई, स्नान के बाद साफ सुथरे वस्त्र धारण कर तैयार हो जाएं। गीता का पाठ कर गौ माता का पूजन करें।