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मुस्लिम बाहुल्य बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय और धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले लगातार बढ़ रहे हैं। भारतीय प्रायद्वीप में आईएसआईएस और अलकायदा ने कुछ हमलों की जिम्मेदारी ली है लेकिन सरकार बांग्लादेश में उनकी मौजूदगी से इनकार करती रही है।

पिछले कुछ महीनों में हुए हमलों में हिन्दू पुजारियों के अलावा धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों, बुद्धिजीवियों एवं विदेशियों को निशाना बनाया गया। ऐसी घटनाओं पर एक नजर-

1- मंदिर के बाहर हिन्दू पुजारी की चाकुओं से गोदकर हत्या

राजधानी ढाका से लगभग तीन सौ किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित झिनयीदाह जिला मुख्यालय के पास एक जुलाई को एक 45 वर्षीय हिन्दू पुजारी श्यामनंदा दास की मंदिर के बाहर तीन युवकों ने चाकुओं से हमला करके उसको मौत के घाट उतार दिया। श्यामनंद पूजा के लिए फूल एकत्र कर रहे थे तभी इस वारदात को अंजाम दिया गया।

2- सुबह सैर पर निकले हिंदू आश्रमकर्मी की गलाकाट कर हत्या

ठाकुर अनुकूल चंद्र सत्संग परमतीर्थ हिमायतपुरधाम आश्रम के 60 वर्षीय नित्यरंजन पांडे 10 जून को सुबह की सैर पर निकले थे, तभी कुछ हमलावरों ने उनकी गर्दन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। पबना के हिमायतपुर उपजिला स्थित आश्रम में पांडे पिछले 40 साल से स्वयंसेवक के तौर पर काम करते थे। इस घटना पर संत समाज ने बांग्लादेश में सुरक्षा से जुड़ी अपनी चिंताओं से पीएम नरेंद्र मोदी को भी अवगत कराया था।

3- हिन्दू पुजारी को पहले गोलियों से भूना, फिर मौत की पुष्टि के लिए गला काटा

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के तीन संदिग्ध हमलावरों ने सात जून को 70 वर्षीय एक हिन्‍दू पुजारी आनंद गोपाल गांगुली का सिर कलम कर दिया था। नोलडांगा गांव में पुजारी आनंद गोपाल सुबह करीब साढ़े नौ बजे मंदिर जा रहे थे कि तभी मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए तीन हमलावरों ने उन्हें रोका और गोली मार दी। मौत की पुष्टि के लिए हमलावरों ने धारदार हथियारों से गांगुली का सिर धड़ से लगभग अलग कर दिया।

4- दुकान में घुसकर हिन्दू दर्जी की हत्या

30 अप्रैल की दोपहर एक हिंदू दर्जी निखिल जोआदर की दुकान में दो लोग घुस आए। देखते ही देखते उन दोनों ने उस पर चाकुओं से हमला कर दिया और वहां से फरार हो गए। दर्जी की मौके पर ही मौत हो गई। निखिल तंगाइल जिले के दुबैल गांव का रहने वाला था। आरोपी घटनास्थल पर एक काले रंग की थैली छोड़कर भाग निकले, जिसमें बम रखा हुआ था।

5- आईएस आतंकियों ने अंग्रेजी प्रोफेसर का गला काटा

ब्लॉगरों, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं पर हुए बर्बर हमलों की श्रृंखला में राजशाही शहर में राजशाही विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एएफएम रेजाउल करीम सिद्दीकी (58) की हत्या कर दी गई। इस बार भी तरीका पुराना था, गला काटकर मारा गया था। सुबह करीब साढे़ सात बजे हमलावरों ने प्रोफेसर पर पीछे से धारदार हथियारों से उस समय वार किया जब वह अपने घर से पैदल विश्वविद्यालय परिसर की ओर जा रहे थे। इस्लामिक स्टेट ने हत्या की जिम्मेदारी ली। पिछले वर्ष चार प्रख्यात धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों की हत्या कर दी गई थी।

उदारवादी और अल्पसंख्यक निशाने पर
07 अप्रैल 2016 : आईएस के आतंकवादियों ने धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर और कानून के एक छात्र की हत्या की

22 मार्च 2016 : बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा ले चुके पादरी हुसैन अली की कुरीग्राम में बदमाशों ने हत्या कर दी

27 फरवरी 2015 : बांग्लादेश में जन्मे एक अमेरिकी ब्लॉगर अविजीत रॉय की हत्या

30 मार्च 2015 : ढाका के तेजगांव क्षेत्र में दिनदहाड़े ब्लॉगर वशीकुर रहमान की उसके घर में हत्या

12 मई 2015 : ब्लॉगर अनंत बिजॉय दास पर सिलहट शहर में नकाबपोश बदमशों ने चाकू से हमला किया

07 अगस्त 2015 : ढाका में पांचवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट में निलॉय चक्रवर्ती की हत्या