Select Page

Saraswati Heritage के अंतर्गत इसी महीने की 30 तारीख को सरस्वती नदी के खोजे गए मार्ग पर पानी छोड़ा जाएगा ताकि मानसून के दौरान उसका बहाव सही ढंग से बना रहे। लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी को ‘जीवित’ करने के लिए सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड (एसएचडीबी) के प्रस्ताव के अनुसार, ऊंचा चंदना गांव से 30 जुलाई को पानी नदी के मार्ग पर छोड़ा जाएगा। नदी के मार्ग में यमुनानगर, कुरूक्षेत्र और कैथल जिले आते हैं। हरियाणा सरकार इस महीने के अंत से नदी के बहाव वाले मार्ग में पानी छोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
आदि बद्री गांव में बांध बनाने की योजना
हेरिटेज बोर्ड का मानना है कि मानसून के कारण नदी में जल का बहाव रहेगा। लंबे समय के बहाव के लिए आदि बद्री गांव में बांध बनाने की योजना है। माना जाता है कि सरस्वती का उद्गम यहीं से हुआ था। यहां पर धार्मिक स्थल के अलावा वाटर पार्क, बोटैनिकल गार्डन और चिडि़याघर बनाने का प्रस्ताव है।
गौरतलब है कि यमुनानगर में सरस्वती के सूख चुके मार्ग पर जब खुदाई की गई तो वहां पानी मिला था, जिसके बाद सरस्वती के मिलने का दावा किया गया।
राजस्थान तक बहती थी सरस्वती नदी
हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज ने कहा, हम लोग दादूपुर फीडर से सरस्वती नदी में पानी छोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं। उसके तौर तरीकों पर काम हो रहा है। यह तथ्य है कि सरस्वती राजस्थान तक बहती थी। यहां तक कि इसरो ने भी इसे माना है।
नदी को ‘जीवित’ करने की परियोजना में 69 संस्थान लगे
उन्होंने बताया कि इस नदी को ‘जीवित’ करने की परियोजना में 69 संस्थान लगे हुए हैं। आईआईटी के साथ मिलकर एक अल्पकालीन संघटन बनाने पर बात चल रही है। यमुनानगर में 6 बोरवेल और दो बोरवेल आदि ब्रदी और मुगलवाली में बनाए जाएंगे।
सरस्वती नदी की खोज के दावों की जांच करने को पैनल
केंद्र सरकार ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर के एस वाल्दिया की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया है, जो हरियाणा सरकार के इस दावे की जांच करेगा कि सरस्वती नदी की खोज की गई है।
गौरतलब है कि 2002 में वाजपेयी सरकार ने भी इन नदी को खोजने के लिए एक पैनल का गठन किया था। लेकिन दो साल बाद यूपीए सरकार के आने पर परियोजना खटाई में पड़ गई।

ऋग्वेद में सरस्वती का अन्नवती तथा उदकवती के रूप में वर्णन

ऋग्वेद में सरस्वती का अन्नवती तथा उदकवती के रूप में वर्णन मिलता है। यह नदी पंजाब में सिरमूर राज्य के पर्वतीय भाग से निकलकर अंबाला तथा कुरुक्षेत्र होती हुई कर्नाल जिला और पटियाला राज्य में दाखिल होकर सिरसा जिले की दृशद्वती (कांगार) नदी में मिल गई थी।

साबरमती बनी है सरस्वती के लिए मिसाल
साबरमती नदी का उद्गम स्थल राजस्थान में उदयपुर के पास धेबर झील है। यह एक बरसाती नदी है, जो राजस्थान से निकलकर गुजरात होते हुए खंभात की खाड़ी में मिलती है लेकिन प्रदूषण के कारण यह बहुत दूषित हो गई और बरसात को छोड़ अन्य मौसम में इसमें पानी की कमी हो जाती थी। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के सीएम थे तब उन्होंने नर्मदा के जल से साबरमती को जीवंत करने का काम किया। प्रदूषण मुक्त करने के लिए अहमदाबाद में कई जगहों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए। शहर में साबरमती के किनारे सौंदर्यीकरण कराया। इसके लिए मोदी की वाहवाही हुई।
– एजेंसी