Select Page

प्राचीन ग्रन्थों में जैसी गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र मिलता है, वह आज भी इलाहाबाद में सांस ले रही है। महर्षि भारद्वाज वेद वेदांग शिक्षण केन्द्र में बटुक यानी छात्र वेद-वेदांग, ज्योतिष, कर्मकांड के साथ अंग्रेजी का भी विद्याभ्यास करते हैं। उनकी दिनचर्या में 18 घंटे की कड़ी मेहनत शामिल है।

विश्व हिन्दू परिषद अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख रहे स्व. अशोक सिंहल ने इसे स्थापित किया था। यह गुरुकुल उनके आवास में स्थापित दो केन्द्रों में चल रहा है। वर्तमान में 80 बटुकों को शुक्ल यजुर्वेद पढ़ाया जाता है। यहां बटुकों की दिनचर्या सुबह 4 बजे शुरू हो जाती है, जो रात 10 बजे तक चलती है। दोनों केन्दों्र में वेद के पांच, अंग्रेजी व ज्योतिष के एक-एक शिक्षक हैं। कक्षा पांच पास बच्चों को यहां दाखिला देते हैं, जिसे आठ साल तक वेद-वेदांग की पढ़ाई कराते हैं।

आचार्य मोहित बताते हैं-‘वेद विद्यालय 1998 में केसर भवन में शुरू हुआ और धीरे-धीरे अयोध्या कानपुर, दिल्ली, काशी, वृंदावन, हरिद्वार में शाखाएं खुल गईं। ये संस्कृत शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं और यहां से पढ़कर निकले बच्चे बीएचयू और इविवि से शोध व जेआरएफ तक कर रहे हैं। ये बच्चे 24 घंटे गुरुओं की निगरानी में अध्ययन करते हैं। यहां आज भी श्रुति परम्परा कायम है।

बटुकों की दिनचर्या

सुबह 4 से 5 बजे तक: नित्यकर्म-स्नान आदि

सुबह 5 से 5.45 बजे तक: संध्या वंदन और हवन

सुबह 5.45 से 6.15 बजे तक: महापुरुष, नदी, तीर्थ व ईश वंदना

सुबह 6.15 से 8 बजे तक: वेद स्वाध्याय

सुबह 8 से 8.30 बजे तक: आरती, प्रार्थना

सुबह 8.30 से 9 बजे तक: स्वल्पाहार

सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक: वेदपाठ

दोपहर 12 से 12.30 बजे तक: मध्याह्न संध्या

दोपहर12.30 से 1.30 बजे तक: भोजन एवं विश्राम

दोपहर 1.30 से शाम 5 बजे तक: वेद, अंग्रेजी अध्ययन

शाम 5 से 6.15 बजे तक: खेलकूद

शाम 6.15 से 7.45 बजे तक: सायं हवन और संध्या वंदन आरती

शाम 7.45 से 8.15 बजे तक: स्वाध्याय

रात 8.15 से 9 बजे तक: भोजन

रात 9 से 9.15 बजे तक: भ्रमण (इवनिंग वॉक)

रात 9.15 से 9.45 बजे तक: लेखन कार्य

रात 9.45 से 10 बजे तक: रात्रि प्रार्थना, दीप विसर्जन