दिल्ली, जून 12, 2016: सोशियल मीडीया का सही प्रयोग इस बार कैराना के मुद्दे पर देखने को मिला है| लोगों के गुस्से ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को कैराना की खबर पर कार्यवाही करने के लिए विवश कर दिया है|

कल ही खबर आई की इस आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को कैराना की खबर के लिए नोटिस जारी कर दिया है|

आगे की कार्यवाही भी जल्द ही रंग दिखाएगी क्यूंकी गुस्से से भरे लोग कैराना में हिंदू विस्थापन की खबर को इतनी जल्दी धूल में मिलने नहीं देंगे| और जो पार्टियाँ इस गुस्से को अनदेखा करेंगी उनका बिस्तरा झोला आने वाले समय में पूरी तरह बँध जाना तय है| वैसे भी जब सरकार के मंत्री एक ट्वीट पर कार्यवाही कर सकते हैं, तो कैराना जैसी खबर पर पर कार्यवाही करने से गुरेज़ क्यूँ?|

अब आते हैं दूसरी सफलता पर, पाकिस्तान के घोटकी में बुज़ुर्ग पर एक पोलिसेवाले ने हमला किया| गोकल दस नाम के हिंदू बुज़ुर्ग अपने घर के बाहर इफ्तार से 40 मिनट पहले कुछ खा रहे थे की तभी रमज़ान के महीने में रोज़ा खुलने से पहले ही खाने की वजह  से गुस्से में पोलीस वाले ने उन पर बुरी तरह हमला कर दिया||

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जरवर, घोटकी पोलीस स्टेशन में बंद गोकल दस को मारने वाला पोलीस वाला

सोशियल मीडीया पर उनकी लाहुलुहन तस्वीर बुरी तरह विराल हो गयी, ना केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया में| और उसके बाद दोषी पोलीस वाले को हिरासत में ले लिया गया| पाकिस्तान के जो हालत हैं, उसमें ऐसा होना कभी भी संभव नहीं होता, पर सोशियल मीडीया पर पड़ती लानत से और कैसे बचा जाता? वैसे भी आए दिन तो मानव अधिकार मुद्दे पर ये इधर उधर से सुनता ही रहता है!

सोशियल मीडीया की सार्थकता इसी में है की हम सभी पूर्ण ज़िम्मेदारी से इसका इस्तेमाल करें!

और वो लोग वाकई में बधाई के पात्र हैं जिन्होने इन दोनो मानव अधिकार के मुद्दों पर सोशियल मीडीया का पूरी ज़िम्मेदारी के साथ इस्तेमाल किया|

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